Thursday, August 17, 2017

किस से करे बात, किसके करीब जाए

बताओ 
किस से 
करे बात
किसके करीब जाए, 
जो तुम नही हो करीब, 
सब हो गए पराये
जो बात तुम में थी
वो अब 
किसी और में
कहाँ से लाये
तुम ही बोलो
किसे छोड़े, 
किसे अपनाये
आज दुनिया 
वीरान सी लगती है
कोई नही है अपना
सबसे नई पहचान सी 
लगती है
तुम्हारे बिना 
जीना कैसा
अब मौत से कहो
मुझे भी 
अपने पास बुलाये
वक़्त है कि 
कटता नही लोगो मे
तुम्हारे बिना 
दिल कहीं लगता नही
अब तुम्ही कहो, 
किस से कहे 
अपना दर्द
किसको अपना 
जख्म दिखाए
बुला लो 
अपने पास मुझे
लगे अपने 
मुझे पराये

2 Comments:

At August 18, 2017 at 2:01 AM , Blogger Upasna Siag said...

bahut sundar

 
At August 18, 2017 at 7:17 AM , Anonymous Anonymous said...

कोई तों होगा कही
मन के किसी कोने में
बैठा होगा चुपचाप
डरकर चकाचौंध भरी रोशनी से
बुदबुदाता होगा धीरे धीरे
जिन्दगी पर लिखी
दर्दभरी कोई गहरी सी नज्म
खोलता होगा घुप्प अँधेरे में कभी-कभार
अपनी बंद हुयी आँखों को
और टटोलता होगा थरथराती उँगलियों से
अँधेरे में किसी "अपने" को
पता है तुम्हें ??
मरहम नहीं है उसके पास लगाने को ...
जख्म ही है बिलकुल तुम्हारे जैसे
जख्म बहुत दिए है ज़माने ने
जख्मों पर तुम्हारे अपने जख्मों को रख
सुबकना चाहता है घडी भर केलिए
बताना चाहता है की अहसास है उसको ....
तुम्हारी हर एक बात का ..हर एक् जख्म का
आखिर ज़माने में दोनों ही के पास
एक दर्द है
दर्द के भीतर फिर एक दर्द है ...
इतर अलग थलग कहीं कोई एक अहसास है
कहीं पड़ा है दबा हुआ समय की गर्द में
उदास भरी जबरन मुस्कुराती एक मुस्कराहट है
तलाशती हुयी आँखें है ...
यादों में गुजरे हुए लम्हें है ....
लम्हों में शरारतें शिकायतें साफगोईया
और अंत में
हिचकियाँ लेती हुयी सहमी सी एक छटपटाहट है ..
दोनों के पास !!



 

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