Sunday, July 16, 2017

हा तुम 
मेरे अपराधी हो..
हुआ हैं 
तुमसे अपराध 
मेरी तस्वीरो को..
ना सहेजने का..
मेरी आवाज़ को 
अनसुना करने का
मेरे फूलो को 
झरने से 
ना बचा पाने का 
मुझे दूर से 
निहारने का..
लेकिन 
मैने तुम्हे 
माफ़ किया..
क्यूंकी 
तुम भी 
मजबूर थे..
समय के .
हाथो...

Tuesday, July 11, 2017

प्रेमहीन स्त्री

स्वार्थ की पराकाष्ठा 
हो तुम

जिंदगी की जंगल में
विष की बेल हो तुम
जिस से लिपटी
उसे अपना पूरा 
जहर दिया
न जीने दिया 
न मरने दिया
धरती पे जो न 
सुख दे सके 
किसी को
ऐसी जंगली बेल हो तुम

क्या करूँ 
तुम्हारे गुणों की चर्चा
तुमने हर किसी को
अपने तीखे 
शब्द बाण
से परखा
न लेने दी सुख की सांस उसे
जिसने तुम्हे हरा भरा किया
कृतग्यहीन, भाव हीन
प्रेमहीन प्रणय मेल हो तुम

क्या कहूं तुम्हे
शब्द कम पड़ जाए
ऐसी दुनिया की जेल हो तुम

Thursday, July 6, 2017

तुम बिन


तुम बिन
क्या आषाढ़
क्या सावन

तुम बिन
रीता मेरा
मन

तुम बिन
भीगी 
मेरी आँखें

तुम बिन
हर पल रोया
मेरा मन

तुम संग
जाने कितनी 
यादें

तुम संग
जैसे हर पल
हो जीवन

जीवन का 
हर घूँट 
अब कडुवा

तुम बिन
जीवन मे
नीरसतापन

तुम बिन
कट रहा है
यू जीवन

जैसे मिली हो 
सज़ा हर दिन
हर पल

सारी खुशियां
आधी अधूरी
तुम संग था
पूर्ण समर्पण

Monday, February 6, 2017

आ रही हूँ मैं

देखो खुश हो न
मेरा भी प्रोग्राम बन रहा है
तुम तक आने का
तुम नहीं आ सकते तो क्या
मैं ही आ जाती हूँ
मिलने से मतलब
तुम आओ या मैं
सब कुछ वैसा का वैसा 
ही चल रहा है 
जैसा तुम छोड़ के गए थे
मैं ही कुछ
 या यु कहो बहुत
 ज्यादा
लड़खड़ा गई हों तुम्हारे बगैर
तुम्हारे वादें, यादें सब बहुत रुलाती हैं
तुम होते तो आज
 कहानी ही कुछ और होती
लेकिन अब तो
 सब उल्टा पुल्टा है
तुम्हे मेरी आदत पता ही है
तुम्हारे सिवा किसी से भी
 खुलती ही कहाँ थी?
अब भी वही हाल है
हां आंख के आंसू
 रुकते ही नहीं
अब तो सीने में भी
 दर्द की शिकायत है
चलो कोई जल्दी नहीं
अब आकर ही विस्तार से बातें करेंगे
बाय बाय 
बाय बाय
See u soon

Wednesday, February 1, 2017

मौत को चुनौती

मौत
आओ मैं तुम्हारा 
वरण करना चाहती हूँ
हिम्मत है तो आँखे मिलाओ
सामने आओ
लेकिन मैं जानती हूँ
तुम नहीं आओगी
डराती हो दुनिया भर को
किंतु
मुझे नहीं डरा पाओगी

लोग रोते है
चीखते है
चिल्लाते है
यहाँ तक कि
तुमसे बचकर 
छिप जाना चाहते है
तब तुम लेती हो 
उनसे और मजे
कभी बीमारी भेज कर
कभी उनसे उनके 
अपनों को छीनकर
या खाली करके 
उनकी दौलत
तुम उन्हें बुरी तरह 
तोड़ देती हो
दिलवा कर उन्हें उन्ही के 
बच्चो से धोखा
उन्हें असहाय कर देती हो
बेचारे टूट कर वो दुनिया से
जब पकड़ लेते है खाट
तुम उन्हें शान से 
चार कंधो पे लाद
अपने घर ले चलती हो

है हिम्मत तो 
कभी किसी समर्थ को
हाथ लगा कर दिखाओ
टूट जायेंगे तुम्हारे बाजू
जरा एक बार 
हाथ तो मिलाओ

Monday, January 23, 2017

कहाँ हो तुम?

दोस्त कहाँ हो
मोबाइल की स्क्रीन पर
हर समय तुम्हारा
चमकता चेहरा
याद दिलाता है
तुम बस आ ही रहे होंगे
सच तुम बिन हर लम्हा
खाली ख़ाली लगता है
कुछ भी नहीं बदला
बस मेरा ही वक़्त बदल गया है
तुम बिन मैं
या मेरे बिन सोचो
एक डरावना ख्वाब सा लगता था
लेकिन पल पल
मैं इस डरावने ख्वाब के साथ
जी रही हूँ
या यूं कहो मर रही हूँ
कहते है
मोहब्बत दो लोगो के बीच में होती है
जब एक मरता है तो
दूसरा अपने आप ही मर जाता है
मेरा भी हाल ऐसा ही है
तुम ही कहो
कैसे जियूँ?????

तुमसे ही तो जिन्दा थी

तुम अचानक 
आ जाओ
और 
मुझे देख लो
शायद 
पहचान भी नहीं पाओगे
तुम सोच रहे होंगे 
क्यों????
सच कहूं 
तुम्हारे जाने से मेरा
भूत, भविष्य, वर्तमान
सब उलट पुलट हो गया
मेरी सारी खुशियां 
तुम्हारे साथ चली गई
मेरे जीने का जज्बा 
लुप्त सा हो गया
यहाँ तक की 
मेरा आत्म विश्वास
जिसपे तुम्हे 
सबसे ज्यादा 
नाज था
वो भी तुम ले गए
या यूँ कहो
खो सा गया है
अब बस बचा है तो 
मेरे पास
बस मेरा खोल!!!
आत्मा शरीर छोड़कर
तुम्हारे साथ जा चुकी है
बची है तो 
चंद साँसे
जो अपनी ही मौत का 
इन्तजार कर रही है
कुछ आंसू 
जो रोज इन आँखों से 
निकलकर
चेहरे में जज्ब हो जाते है
बची हैं 
तुम्हारी अनमोल यादें
जो मुझे जीने नहीं देती
मर तो मैं
तुम्हारे साथ ही गई थी!!!!